घर की खुदाई में मिला निखात, विजय कुम्हार ने जिलाधिकारी को सौंपा
1.70 ग्राम वजन के निखात की अनुमानित कीमत करीब 17 हजार रुपये

महासमुंद, छत्तीसगढ़ | ग्राम सुअरमार निवासी विजय कुम्हार के घर में मकान निर्माण के लिए जमीन की खुदाई के दौरान मिले निखात को 13 अगस्त को नियमानुसार जिला प्रशासन को सौंप दिया गया। विजय कुम्हार अपने घर की खुदाई में मिले धातु के निखात को जमा कराने के लिए जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने इसे कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को सौंपा। जिला प्रशासन द्वारा निखात को सुरक्षित रूप से जमा कराया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका वजन लगभग 1.70 ग्राम है और अनुमानित कीमत करीब 17 हजार रुपये बताई गई है।
मकान निर्माण के दौरान जमीन में मिला निखात
ग्राम सुअरमार निवासी विजय कुम्हार के घर में मकान निर्माण का काम चल रहा था। इसी दौरान जमीन की खुदाई करने पर निखात मिला। जानकारी के अनुसार यह धातु लगभग तीन फीट की गहराई में उत्खनन के दौरान प्राप्त हुई।
विजय कुम्हार ने इसे अपने पास रखने के बजाय नियमानुसार जिला प्रशासन को सौंपने का निर्णय लिया। इसके लिए वे 13 अगस्त को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और निखात को जमा कराया। प्रशासन की ओर से प्राप्त वस्तु को सुरक्षित रूप से जमा कराया गया।
कलेक्टर को सौंपा गया निखात
मकान मालिक विजय कुम्हार ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को निखात सौंपा। इस दौरान उनके साथ ग्राम सुअरमार के पूर्व सरपंच मूलचंद चंद्राकर तथा पूर्व माध्यमिक शाला कसेकेरा के प्रधान पाठक विजय शर्मा भी उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन को सौंपे गए निखात का वजन लगभग 1.70 ग्राम बताया गया है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 17 हजार रुपये बताई गई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी वास्तविक धातु संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सुअरमार गढ़ क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को लेकर जिज्ञासा
घटना का संबंध छत्तीसगढ़ के पूर्वी भाग में स्थित ऐतिहासिक सुअरमार गढ़ क्षेत्र से बताया गया है। मकान निर्माण के दौरान स्वर्ण रंग जैसी दिखाई देने वाली धातु का अवशेष मिलने के बाद क्षेत्र के पुरातात्त्विक और ऐतिहासिक महत्व को लेकर नई जिज्ञासा उत्पन्न हुई है।
स्थानीय स्तर पर इस धातु को स्वर्ण धातु का अवशेष माना जा रहा है, लेकिन केवल रंग या बाहरी स्वरूप के आधार पर इसकी वास्तविक धातु संरचना की पुष्टि नहीं की जा सकती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसके संबंध में अभी वैज्ञानिक परीक्षण नहीं हुआ है।
करीब तीन फीट की गहराई में मिला धातु खंड
विजय कुम्हार के मकान निर्माण के दौरान लगभग तीन फीट की गहराई तक खुदाई की गई थी। इसी दौरान यह धातु खंड प्राप्त हुआ। प्राप्ति स्थल से काली मिट्टी और पुरानी खपरैल यानी मिट्टी की टाइलों के अवशेष भी मिलने की जानकारी दी गई है।
इन अवशेषों की मौजूदगी के कारण क्षेत्र में इस धातु वस्तु को लेकर जिज्ञासा और बढ़ी है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में इन अवशेषों की उम्र या उनके किसी निश्चित ऐतिहासिक काल से संबंध की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना फिलहाल उचित नहीं होगा।
चपटी और अनियमित आकार की है धातु वस्तु
प्राप्त धातु वस्तु चपटी और अनियमित आकार की बताई गई है। इसकी सतह पर दबाव और मोड़ के निशान दिखाई देते हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार प्रथम दृष्टया यह हथौड़े से पीटकर तैयार की गई धातु पट्टिका अथवा पत्र जैसी प्रतीत होती है।
हालांकि यह केवल प्रारंभिक स्वरूप के आधार पर किया गया आकलन है। वस्तु वास्तव में किस धातु की है और इसका स्वरूप या उपयोग क्या रहा होगा, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। अभी तक इसकी वास्तविक धातु संरचना को लेकर कोई वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
वैज्ञानिक परीक्षण से स्पष्ट होगी वास्तविक धातु संरचना
निखात को जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद इसकी वास्तविक प्रकृति को लेकर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक धातु की वैज्ञानिक जांच नहीं हुई है। ऐसे में इसे निश्चित रूप से स्वर्ण धातु बताना उचित नहीं होगा।
स्थानीय स्तर पर इसे स्वर्ण रंग जैसी धातु के अवशेष के रूप में देखा जा रहा है और इसकी अनुमानित कीमत करीब 17 हजार रुपये बताई गई है। लेकिन वास्तविक कीमत और धातु की संरचना वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
प्रशासन ने निखात को सुरक्षित जमा कराया
विजय कुम्हार द्वारा निखात जिला प्रशासन को सौंपे जाने के बाद इसे सुरक्षित रूप से जमा कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया में विजय कुम्हार के साथ ग्राम सुअरमार के पूर्व सरपंच मूलचंद चंद्राकर और पूर्व माध्यमिक शाला कसेकेरा के प्रधान पाठक विजय शर्मा भी मौजूद रहे।
मकान निर्माण के दौरान जमीन से मिली वस्तु को प्रशासन को सौंपे जाने से अब इसके संबंध में आगे की प्रक्रिया जिला प्रशासन के स्तर पर हो सकेगी। उपलब्ध जानकारी में आगे होने वाली किसी जांच या परीक्षण की विस्तृत प्रक्रिया का उल्लेख नहीं है।
जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामने आया उदाहरण
घर की खुदाई के दौरान मिली धातु वस्तु को अपने पास रखने के बजाय विजय कुम्हार द्वारा जिला प्रशासन को सौंपना इस घटना का महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने निखात को नियमानुसार जमा कराने के लिए स्वयं जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रशासन को सौंपा।
सुअरमार क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए जमीन से मिले इस तरह के अवशेष को लेकर स्वाभाविक रूप से जिज्ञासा पैदा हुई है। हालांकि इसके ऐतिहासिक या पुरातात्त्विक महत्व को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष के लिए वैज्ञानिक अथवा संबंधित स्तर की जांच आवश्यक होगी।
अब जांच और पुष्टि का इंतजार
फिलहाल जिला प्रशासन के पास निखात सुरक्षित रूप से जमा है। इसका वजन लगभग 1.70 ग्राम और अनुमानित कीमत करीब 17 हजार रुपये बताई गई है। वस्तु स्वर्ण रंग जैसी दिखाई देती है, लेकिन इसकी वास्तविक धातु संरचना की पुष्टि अभी वैज्ञानिक परीक्षण से नहीं हुई है।
सुअरमार गढ़ क्षेत्र में मकान निर्माण के दौरान करीब तीन फीट की गहराई से धातु खंड मिलने और उसी स्थान से काली मिट्टी तथा पुरानी खपरैल के अवशेष मिलने की जानकारी ने क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को लेकर जिज्ञासा बढ़ाई है। अब इस वस्तु की वास्तविक प्रकृति और महत्व को लेकर आगे की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी।
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