मुनगाशेर सहकारी समिति में घटिया खाद-बीज का मामला गरमाया
किसान संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

महासमुंद| छत्तीसगढ़ में किसानों की समस्याओं को लेकर शासन-प्रशासन की उदासीनता एक बार फिर सामने आई है। भारतीय किसान संघ (छत्तीसगढ़ प्रदेश) ने सहकारी समिति मुनगाशेर में घटिया बीज और खाद के वितरण को लेकर मोर्चा खोल दिया है। किसानों का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से वे बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

जांच में देरी से बढ़ी नाराजगी
किसानों के अनुसार, सहकारी समिति मुनगाशेर से बीज और खाद के सैंपल लिए गए थे, लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। किसानों ने इसे अपना “दुर्भाग्य” बताते हुए कहा कि प्रशासन अपनी मनमर्जी कर रहा है। आरोप है कि किसानों को अधपका चावल युक्त (करगा) धान प्रमाणित बीज के नाम पर दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ रही है।
फसल नुकसान की भरपाई की मांग
रबी फसल के दौरान घटिया खाद के उपयोग से हुए कम उत्पादन के कारण किसान आक्रोशित हैं। 18 अप्रैल को सहकारी समिति के प्रबंधक को ज्ञापन सौंपकर किसानों ने मांग की है कि:
फसल उत्पादन में आई कमी की भरपाई शासन द्वारा मुआवजे के रूप में की जाए।
बिजली के लो-वोल्टेज और पानी की कमी की समस्या का तत्काल निराकरण हो।
कलेक्टर तक नहीं पहुंचा मामला
किसान नेताओं का कहना है कि ज्ञापन सौंपे जाने के बावजूद यह मामला अभी तक कलेक्टर महोदय के संज्ञान में नहीं आया है। किसानों की स्थिति बदतर होती जा रही है; वे केवल घाटे की खेती करने को मजबूर हैं। घास-बदौरी (खरपतवार) जैसी मुसीबतें लागत को और बढ़ा रही हैं।
“लाभकारी मूल्य पाना है” – किसानों का संकल्प
किसान संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उचित कार्यवाही नहीं हुई, तो प्रदेश के किसान ठोस कदम उठाने पर मजबूर होंगे। किसानों ने नारा बुलंद किया है— “लाभकारी मूल्य पाना है, हम अपना अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते।” उनकी मुख्य मांग बिजली और पानी की पूर्ण आपूर्ति के साथ फसल का उचित दाम सुनिश्चित करना है।
इस विरोध प्रदर्शन में “जय जवान, जय किसान” और “जय बलराम” के नारों के साथ किसानों ने प्रशासन को अपनी मांगों पर विचार करने के लिए आखिरी चेतावनी दी है।
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